Thursday, July 14, 2016

विनाश की आँधी ....

   विनाश  की आँधी ....

चल  पड़ी  है  एक  बार  फिर ,
विनाश  की  वह आँधी,
समाज  के  विघटन  की 
और  सर्वनाश  की  आँधी ...

आशा  और  निराशा  के  बीच
द्वन्द  की  एक  आँधी 
अपेक्छा  और  अभिलासा की ,
स्वछंद सी  एक  आँधी ..

निर्मम  हत्याओं  की  लगाती ,
एक  कतार  सी  यह  आँधी ,
धर्म  और  अधर्म  के  वकीलों  के 
व्यापार  की  ये  आँधी  ,

मानवता  और  संवेदना  के ,
परिहास  की  एक  आँधी ,
निरन्तर  धूमिल  होते  धैर्य  
और  विश्वास  की  एक  आँधी 




स्वार्थ  और  लोभ के  कीचड़  में  सनी 
बदहवास  यह  आँधी ,
प्रेम  और  स्नेह  की  छाया  से ,
हताश  ये  आँधी ...

आँधी  है  कोरे  उसूलों  की 
आँधी  है  झूठे  रसूलों  की 
झूठे  बहकावे , क्षणिक आवेश 
और  कच्चे  उन्माद  की  एक  आँधी 

सोई  रही  जो  सदियों  तक ,
बरसों पड़ी  थी  कब्र  में ,
अब  आज़ाद  है  ये  आँधी 
अब  आज़ाद  है  ये  आँधी 

                  -सिद्धार्थ श्रीवास्तव 

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